गुरुवार, 24 सितंबर 2015

भारत पर आईएस की कुदृष्टि


अबू धाबी से 11 संदिग्ध भारतीय युवाओं का वापिस भारत भेजा जाना किसी बड़े खतरे की तरफ संकेत कर रहा है। कथित तौर पर यह युवा इस्लामिक स्टेट में भरती होने जा रहे थे। इस घटना के बाद हमारा यह मुगालता तो जरूर दूर हो गया होगा कि भारतीय मुसलमाल अतिवादी नहीं है। फेसबुक जैसी सोशल साइट्स के जरिए आईएस के झांसे में फंस रहे भारतीय मुस्लिम युवा विध्वंसकारी कट्टरपंथ की तरफ अग्रसर हो रहे हैं।
जम्मू-कश्मीर में पिछले कुछ अरसे से हर सप्ताह शुक्रवार को नमाज के बाद रैली निकाली जा रही है और इस दौरान इस्लामिक स्टेट के झंडे लहराए जा रहे हैं। इन झंडों पर “ISJK” लिखा होता है। जम्मू कश्मीर में बेधड़क होती इन गतिविधियों से केंद्र सरकार के कान खड़े होना लाजिमी हैं। यही कारण है कि अबू धाबी में 11 संदिग्ध भारतीय युवाओं पर समय रहते सुरक्षा एजेंसियों की नजर में आ गए और इन्हें वापसी का रास्ता दिखाया गया। अब राष्ट्रीय सुरक्षा एंजेसियों की नजर उन राज्यों पर है, जहां किसी न किसी प्रकार की आतंकी गतिविधियां हुई हैं। सरकार इस बात को लेकर भी सजग है कि कहीं आईएस देश में अपना स्लीपर सेल ना विकसित कर ले। लेकिन चिंता यहीं खत्म नहीं हो जाती है क्योंकि देश में केरल, हैदराबाद, बेंगलुरु, जम्मू कश्मीर से जिस तरह की सूचनाएं मिल रही है, उससे यही लग रहा है कि कम संख्या में सही लेकिन यहां के युवा आईएस में भरती होने के लिए उतावले हो रहे हैं। कुछ समय पूर्व आईएस ने एक वीडियो भी जारी किया था, जिसमें भारत में अपने विस्तार का ऐलान किया था।
सीरिया और इराक में अपना मजबूत तंत्र स्थापित करने के बाद आईएस ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देशों में भी बेस तैयार कर चुका है। अब पाकिस्तान, भारत, बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देश जहां मुस्लिमों की संख्या अच्छी-खासी है, इस्लामिक स्टेट की नजर में है। आईएस इन देशों पर भी खलीफा का राज स्थापित करना चाहता है।
सूचना प्रोद्योगिकी और तकनीक का इस्तेमाल आंतकियों ने हथियार की तरह किया है। हम इसे रोक तो नहीं सकते। लेकिन अब हमारे सामने सबसे बड़ा संकट निगरानी का है। लेकिन हम सतर्क जरूर रह सकते हैं। जब देश में 80 करोड़ लोगों का आधार कार्ड बनाया जा सकता है, तो हम ऐसी ही किसी योजना के जरिए आईएस जैसे विध्वंसकारी संगठनों की गतिविधियों में निगरानी भी रख सकते हैं। लेकिन इसके लिए वैकल्पिक तकनीकी सिस्टम विकसित करना होगा। हमें सतर्क रहने की और सतत निगरानी की जरूरत है। यूएई, बहरीन और कुवैत जैसे देश भी भारत की तरफ आशा भरी नजरों से देख रहे हैं। हमें डरने की जरूरत नहीं है, लेकिन हम हालात को बेकाबू भी नहीं होने दे सकते। इसलिए समय रहते ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता जरूर है।


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