शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

एक हैं शाहरूख खान, एक हैं दाऊद खान





 


एक और जब पूरे देश में असहिष्णुता की बात हो रही है, सांस्कृतिक सौहार्द्र के बिगड़ने की बात हो रही है, तो मुझे दाऊद खान याद आ रहे हैं। शायद इसलिए भी, क्योंकि  भारत को असहिष्णु बताने वाले बॉलीवुड अभिनेता शाहरूख खान अपने बड़बोलेपन में यह भी भूल गए कि जो नाम, दौलत और शोहरत उनके पास है, वह इसी भारतभूमि की देन है। उनकी तरक्की देखकर ही फवाद खान और माहिरा खान (शाहरूख की अगली फिल्म रईस की अभिनेत्री) जैसे पाकिस्तानी अभिनेताओं ने भारत का रुख कर लिया है और सबसे बड़ी बात यह कि भारतीय निर्माता-निर्देशकों ने खुले दिल से उनका स्वागत भी किया है। शाहरूख को यह बताने की जरूरत है कि इस देश में और भी मुस्लिम बंधु हैं, जो दिल से इस भारतभूमि का शुक्रिया अदा करते हैं और इसकी सांस्कृतिक विरासत के असल वाहक हैं। केवल बड़े पर्दे पर ठुमके लगाने को सांस्कृतिक योगदान मान लेना लोगो की बड़ी भूल है।
खैर बात दाऊद खान की। 93 वर्षीय पूर्व शिक्षक दाउद खान छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के निवासी हैं। छत्तीसगढ़ में रामकथा वाचक और मानस मर्मज्ञ के रूप में उनकी प्रतिष्ठा और पहचान है। वे पिछले 68 वर्षो से सार्वजनिक आयोजनों में रामकथा वाचन करते आ रहे हैं। हाल ही में छत्तीसगढ़ के संस्कृति विभाग ने दाउद खान का यह प्रवचन कार्यक्रम रायपुर में भी रखा, जिसका विषय भी उतना ही मनोरम था, जितना की दाऊद खान का मानस प्रवचन, राम: सांस्कृतिक सौहार्द्र के प्रतीक शीर्षक से आयोजित आख्यान कार्यक्रम का अनुभव ही अनूठा था। कार्यक्रम के दौरान ही मुझे न जाने कितने खान याद आए, जिन्होंने अपने कुकर्मों से केवल भारत को कलंकित करने का काम किया है। तब मंच से रामचरित मानस की गंगा बहा रहे दाऊद खान के सामने मेरा सर श्रद्धा से झुक गया।
राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त दाऊद खान 1949 से 1960 तक लगातार 11 साल तक हर वर्ष रायपुर शहर में मानस प्रवचन कर चुके है। छत्तीसगढ़ की संस्कारधानी बिलासपुर में भी उन्हें दस वर्षो तक हर साल तुलसीदासकृत  रामचरित मानस पर अपना प्रवचन दिया है। श्री खान विगत 68 वर्षो से भी अधिक समय से रामचरित मानस का प्रवचन करते हुए रामकथा के सद्भाव पक्षों को और मानस के संदेशों को जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। श्री खान हिन्दी, संस्कृत और छत्तीसगढ़ी भाषा के अच्छे जानकार हैं। रामचरित मानस का उन्होंने गहरा अध्ययन किया है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह कहते हैं कि दाऊद खान ने गोस्वामी तुलसीदास के लोकप्रिय महाकाव्य रामचरित मानस पर आधारित अपने प्रवचनों के जरिए मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की प्रेरक जीवनगाथा को जन-जन तक पहुंचाने का काम किया है। श्री खान का संपूर्ण जीवन सामाजिक समरसता का प्रतीक है। वे लगभग 68 वर्षों से छत्तीसगढ़ सहित देश के विभिन्न शहरों में रामकथा वाचन का कार्य कर रहे हैं।
श्री खान ने अपना पहला प्रवचन वर्ष 1947 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में दिया था। रामकथा वाचन की प्रेरणा उन्हें छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी और श्री सालिक राम द्विवेदी से मिली। उनके सानिध्य में रहकर श्री खान ने रामायण, कुरान, गुरूग्रंथ साहिब, बाईबिल और गीता सहित कई धर्म ग्रंथों का गहन अध्ययन किया। श्री दाऊद खान को तत्कालीन राष्ट्रपति श्री व्ही.व्ही. गिरी द्वारा वर्ष 1970 में सम्मानित किया जा चुका है। श्री खान को विभिन्न संस्थाओं द्वारा समय-समय पर पुरस्कृत और सम्मानित किया गया है। 
छत्तीसगढ़ के दाऊद खान करारा तमाचा हैं, उन तमाम लोगों के लिए, जो इस पुण्यभूमि को कुख्यात करने का षडयंत्र करने में लगे हुए हैं। दाऊद कहते हैं कि वे बार-बार इस भारतभूमि पर जन्म लेना चाहते हैं, ताकि रामचरित मानस के माध्यम से वे बारंबार लोगों को जीने की सही राह दिखा सकें। उनके जीवन मर्यादा पुरुषोत्तम राम की तरह मर्यादित कर सकें
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