मंगलवार, 10 दिसंबर 2013

राहुल गांधी की हैट्रिक



छत्तीसगढ़ में भाजपा की जीत के साथ-साथ ना केवल कांग्रेस की, बल्कि पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी की हार की भी हैट्रिक हुई है। 2003, 2008 और 2013 के विधानसभा चुनावों पर नजर डालें तो हर बार राहुल गांधी की झोली में अजीत जोगी, वही बार-बार दोहराए गए कांग्रेस उम्मीदवार और परिणामस्वरूप हार ही नसीब हुई है।
छत्तीसगढ़ बनने के बाद हुए तीनों ही विधानसभा चुनाव कांग्रेस के साथ-साथ राहुल गांधी के लिए भी निराशाजनक रहे हैं। इस बार यानि कि 2013 के चुनावों में राहुल छत्तीसगढ़ को लेकर सबसे ज्यादा आशान्वित नजर आ रहे थे। चुनाव परिणाम आने के ठीक एक दिन पहले दिल्ली में हुई समीक्षा बैठक में भी छत्तीसगढ़ के नेताओं ने राहुल को भरपूर भरोसा दिलाया था कि प्रदेश में कांग्रेस की ही सरकार बन रही है। लेकिन पिछले चुनावों के नतीजों को दोहराते हुए कांग्रेस फिर सत्ता से दूर ही रह गई।
कांग्रेस ने इस बार भले ही अजीत जोगी को पार्टी का चेहरा बनाकर चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन सबसे ज्यादा टिकट उनकी ही पंसद के उम्मीदवारों को दिए गए। खुद राहुल गांधी अपने फार्मूले पर अडिग नहीं रह पाए और छत्तीसगढ़ में पुराने ही चेहरों पर दांव लगा दिया। इस चुनाव में कांग्रेस के 26 विधायकों ने हार का सामना किया है। जिनमें से दस नाम ऐसे दिग्गज नेताओं के हैं, जो लगातार या तो छह-छह बार चुनाव जीतते रहे हैं, या फिर कांग्रेस के बड़े चेहरे हैं। इनमें नेता प्रतिपक्ष रविंद्र चौबे, बोधराम कंवर, रामपुकार सिंह, शिव डहरिया, धरमजीत सिंह, राजकमल सिंघानिया, अग्नि चंद्राकर, अमितेश शुक्ला, मोहम्मद अकबर जैसे नाम शामिल है।
छत्तीसगढ़ के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चरणदास मंहत ने हार को स्वीकार करते हुए कहा कि जनता का फैसला सर आंखों पर है। लेकिन कांग्रेस के दस दिग्गज उम्मीदवारों का हार जाना, जो पिछले छह-छह विधानसभा चुनाव जीतते रहे हैं, आश्चर्य का विषय है। मंहत ने कहा कि भीतरघात तो हुआ ही है, उसकी शिकायत आलाकमान से की जाएगी।
उधर, सूबे के मुख्यमंत्री रमन सिंह ने परिणाम आने के बाद चुटकी लेते हुए कहा कि ये हमारी जीत की हैट्रिक तो है ही, कांग्रेस की हार की भी हैट्रिक है। रमन सिंह ने अपनी जीत का श्रेय जनता के साथ-साथ पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं, खासकर भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को भी दिया।
बहरहाल छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को एक बार फिर ना उम्मीदी हाथ लगी है। हालांकि दिन भर चली मतगणना में कई बार ऐसे मौके भी आए, जब रूझान कांग्रेस की तरफ जाता हुआ दिखाई दिया। लेकिन अंत्तोगत्वा जीत का सेहरा भाजपा के माथे ही बंधा।
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