रविवार, 14 मार्च 2010

जय राम जी की

दोस्तों,

लम्बे समय बाद अपने ब्लॉग पर लौटी हूं। लेकिन अब सतत जुड़ी रहूंगी। अपनी अभिव्यक्ति के लिए सबसे सशक्त माध्यम, जिसमें किसी दूसरे का हस्तक्षेप न हो। ऐसे ही इस माध्यम इस मंच के जरिए अपने अनुभव आप लोगों के साथ बांटने की इच्छा है। आशा है कि मुझे आप जैसे कई दोस्तों का सहयोग मिलेगा। इस वक्त जब मैं ये लाइनें लिख रही हूं, तब मुझे बचपन याद आ गया। हम अपने ननिहाल वालों को चिट्ठियां लिखा करते थे और उनके जवाब का इंतजार भी करते थे। आज लग रहा है कि इतने हाईटेक माध्यम के जरिए मैं फिर से उन्हीं खतों के ज़माने में पहुंच गई हूं।

प्रियंका।

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